पुणे के राहुल बकरे और विनीत फडणीस को ‘बोरचार्जर’ डेवलप करने वाले को इंफोसिस फाउंडेशन के आरोहण सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स में 50 लाख रुपये के इनाम से सम्मानित किया गया
पुणे के फाल्गुन व्यास, नेहा पंचमिया और नचिकेत उतपत और सौम्या एस और पल्लवी कुलकर्णी को सोशल इनोवेशन के लिए सम्मानित किया गया उनके क्रिएटर्स को 10 लाख रुपये दिए गए
पुणे के फाल्गुन व्यास, नेहा पंचमिया और नचिकेत उतपत और सौम्या एस और पल्लवी कुलकर्णी को सोशल इनोवेशन के लिए सम्मानित किया गया उनके क्रिएटर्स को 10 लाख रुपये दिए गए
पुणे नवंबर, 2025: इन्फोसिस की समाजसेवी एवं सीएसआर इकाई इन्फोसिस फाउंडेशन ने आज आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स के चौथे संस्करण के विजेताओं की घोषणा की। इस साल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के रूप में तीन प्रमुख क्षेत्रों में अनूठे इनोवेशन को पुरस्कृत किया गया। ये पुरस्कार टेक्नोलॉजी, रचनात्मकता एवं संवेदना के साथ सामाजिक प्रभाव को गति देने के इन्फोसिस फाउंडेशन के मिशन के अनुरूप हैं। प्रतिष्ठित ज्यूरी ने 2,000 आवेदनों में से विजेताओं का चयन किया।
आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स 2025 के प्रत्येक विजेताओं को उनके प्रभावी इनोवेशन के लिए 50 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई-
शिक्षा – ‘कनेक्टिंग द डॉट्स’ डेवलप करने वाले बेंगलुरु के राजेश ए राव, रविंद्र एस राव और दीपा एल बी राजीव को शिक्षा के क्षेत्र में पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह एक इंटरैक्टिव लर्निंग प्रोग्राम है, जिसे रोजाना लाइव क्लास के माध्यम से सरकारी स्कूल के कक्षा 6 से 10 के छात्रों को एसटीईएम एवं स्पोकन इंग्लिश पढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही प्रभावी तरीके से सीखने के लिए इसमें लैब किट, स्कॉलरशिप और टीचर ट्रेनिंग की भी व्यवस्था है।
स्वास्थ्य – ‘क्लूइक्स सी012’ डेवलप करने वाले नई दिल्ली के चितरंजन सिंह और रॉबिन सिंह को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनूठे योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया। यह एक पोर्टेबल एआई और आईओटी इनेबल्ड वाटर क्वालिटी एनालाइजर है, जो रियल टाइम में जीपीएस टैग्ड रिपोर्ट तैयार करता है। यह 30 मिनट के भीतर पानी से होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए 14 प्रमुख मानकों पर जांच करता है। इससे शहरी एवं ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के लिए भरोसेमंद वाटर टेस्टिंग किफायती, सुगम और सरल हो जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण – ‘बोरचार्जर’ डेवलप करने वाले पुणे के राहुल सुरेश बकरे और विनीत मोरेश्वर फडणीस को इस क्षेत्र में पुरस्कार के लिए चुना गया। यह दुनिया की पहली रोबोटिक आर्टिफिशियल बोरवेल रिचार्ज तकनीक है, जो सालाना 4 से 80 लाख लीटर वर्षाजल को मौजूदा बोरवेल में पहुंचा सकती है। इससे सिंचाई की व्यवस्था, कृषि उत्पादन और किसानों की आय बेहतर करना संभव होगा, पेयजल की गुणवत्ता एवं मात्रा बढ़ेगी, जिससे लोगों का जीवन सुगम बनेगा।
इन्फोसिस फाउंडेशन के चेयरमैन सलिल पारेख ने कहा, ‘उद्देश्य के साथ इनोवेशन में लोगों के जीवन को बदलने और पर्यावरण के अनुकूल भविष्य का निर्माण करने की ताकत है। आरोहण सोशल इनोवेशन अवार्ड्स इस भरोसे का प्रतीक है और ऐसे लोगों को सम्मानित करने का माध्यम है, जो सहजता, सहानुभूति और प्रभाव के साथ चुनौतियों को अवसरों में बदल देते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्यों को सम्मानित करते हुए इन्फोसिस फाउंडेशन में हमारा लक्ष्य ऐसे इनोवेशन का प्रभाव बढ़ाना और बदलाव करने वाली पीढ़ी को प्रोत्साहित करना है, जो समतापूर्ण और दृढ़ भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
इन श्रेणियों के विजेताओं के अतिरिक्त, ज्यूरी ने पांच अन्य सोशल इनोवेशन को भी चुना और उनके क्रिएटर्स में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया। ज्यूरी की तरफ से स्पेशल अवार्ड पाने वाले इनोवेशन हैं-
सुकून – डिजिटल हाइब्रिड आईडीईसी मैकेनिज्म पर आधारित स्मार्ट जैकेट, जो ज्यादा गर्म वातावरण में भी लोगों को ठंडक का अनुभव देता है, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर होता है और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है। इसे पुणे के फाल्गुन मुकेश व्यास ने तैयार किया है।
कम्प्रेहेंसिव वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म – यह एक वेब बेस्ड प्लेटफॉर्म है, जो वाइल्डलाइफ रेस्क्यू, ट्रीटमेंट, रीहैबिलिटेशन और रिलीज के आंकड़ों का रिकॉर्ड रखता है और उन्हें मैनेज करता है। इसमें जानवरों, मनुष्यों एवं पर्यावरण की स्थिति को जोड़ने के लिए ‘वन हेल्थ’ फ्रेमवर्क का प्रयोग करते हुए गवर्नेंस, निगरानी और खतरों के अनुमान में मदद मिलती है। इसे पुणे के नेहा पंचमिया और नचिकेत उतपत ने बनाया है।
प्रोजेक्ट बिंदु – एक इनीशिएटिव जो दिव्यांगजनों के लिए रिमोट, टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित वर्क इकोसिस्टम बनाता है, जो वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करने, बैकएंड सपोर्ट, डाटा हैंडलिंग और को-ऑर्डिनेशन में मदद करते हैं। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को आर्थिक आत्मर्निभरता और समावेश का मौका मिलता है। पुणे की सौम्या एस और पल्लवी कुलकर्णी ने इसे तैयार किया है।
सर्विचेक – भारत का पहला सीडीएससीओ एप्रूव्ड एट-होम सेल्फ सैंपलिंग किट, जिससे एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) की स्क्रीनिंग की जा सकती है। इसे वडोदरा के अनिर्बान पालित, डॉ. सायंतनी प्रामाणिक और पालना पटेल ने तैयार किया है।
हेक्सिस एंड आइरिस – दृष्टिबाधित छात्रों के लिए भारत का एकमात्र इंटीग्रेटेड लर्निंग इकोसिस्टम जिसमें अनूठे रिफ्रेश किए जा सकने वाले ब्रेल डिस्प्ले, टैक्टाइल डायग्राम एक्सप्लोरर और टीचर-कंटेंट प्लेटफॉर्म को साथ जोड़ा गया है, जिससे के-12 स्पेशल स्कूलों के लिए एसटीईएम लर्निंग एवं एडवांस्ड रीडिंग और इन्क्लूसिव क्लासरूम की व्यवस्था मिलती है। इसे बेंगलुरु के नागराजन राजगोपाल, विद्या वाई और सुप्रिया डे ने विकसित किया है।

