न्युवोको विस्टास ने पश्चिम भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार करते हुए, सूरत में शुरू किया लिमला सीमेंट प्लांट
- वदराज सीमेंट लिमिटेड (न्युवोको विस्टास की सहायक कंपनी) की 60 लाख टन सालाना स्थापित क्षमता में से सूरत के लिमला प्लांट में 20 लाख टन सालाना ग्राइंडिंग क्षमता की शुरुआत, गुजरात में न्युवोको विस्टास की एंट्री
- पश्चिम भारत में कंपनी की उपस्थिति और मजबूत होगी, कच्छ स्थित क्लिंकर प्लांट का भी मिलेगा साथ
- वित्त वर्ष 2027-28 तक कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 3.5 करोड़ टन सालाना तक पहुँचाने का लक्ष्य
गुजरात, 11 जुलाई, 2026: भारत की प्रमुख बिल्डिंग मटेरियल कंपनियों में से एक, न्युवोको विस्टास कॉर्प. लिमिटेड ने गुजरात के सूरत में स्थित अपने लिमला सीमेंट प्लांट (एलसीपी) का उद्घाटन किया। यह प्लांट वदराज सीमेंट लिमिटेड (वीसीएल) की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में से एक है। इसके साथ ही, न्युवोको ने गुजरात में अपनी शुरुआत कर दी है। यह कदम वदराज सीमेंट लिमिटेड के अधिग्रहण, उसके संचालन को दोबारा शुरू करने और पश्चिम भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने की दिशा में कंपनी की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कंपनी ने जून 2025 में 1,800 करोड़ रुपए का भुगतान कर कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) से गुजर रही वदराज सीमेंट लिमिटेड का अधिग्रहण पूरा किया था। वदराज सीमेंट के पास कच्छ में क्लिंकर यूनिट और सूरत के लिमला में ग्राइंडिंग यूनिट मौजूद है। इसके अलावा कंपनी के पास कच्छ में उच्च गुणवत्ता वाले अपने चूना पत्थर के भंडार और एक कैप्टिव जेट्टी भी है, जिससे परिवहन व्यवस्था बेहतर होती है। इन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने के बाद न्युवोको ने कच्छ और लिमला, दोनों इकाइयों में मरम्मत, आधुनिकीकरण और विस्तार का काम किया। इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि आज लिमला सीमेंट प्लांट का संचालन शुरू हो गया है।
इस मौके पर न्युवोको विस्टास कॉर्प. लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर जयकुमार कृष्णास्वामी ने कहा, “सूरत के लिमला ग्राइंडिंग यूनिट की शुरुआत न्युवोको के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही, यह योजनाबद्ध तरीके से कारोबार बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। गुजरात हमारे लिए एक अहम् बाजार है, जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास, उद्योगों का विस्तार, बढ़ता शहरीकरण और आवास व निर्माण क्षेत्र में लगातार बढ़ती माँग हमें आगे बढ़ने के उत्कृष्ट अवसर देती है। इस प्लांट के शुरू होने से हमारी मौजूदगी और मजबूत होगी। साथ ही, उत्तर और पश्चिम भारत के ग्राहकों तक हम अपने प्रोडक्ट्स पहले से ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से पहुँचा सकेंगे।”

लिमला सीमेंट प्लांट की ग्राइंडिंग यूनिट तय समय से पहले तैयार हो गई है। इसके साथ यहाँ 20 लाख टन सालाना ग्राइंडिंग क्षमता की सफल शुरुआत भी हो गई है। इससे न्युवोको की उत्पादन क्षमता और बाजार तक पहुँच, दोनों मजबूत होंगी। वदराज सीमेंट की सभी इकाइयों के पूरी तरह शुरू होने के बाद न्युवोको की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उत्तर और पश्चिम भारत में स्थित उसके प्लांट्स से आएगा। इससे कंपनी की उत्पादन क्षमता और मजबूत होगी, तेजी से बढ़ते बाजारों तक उसकी पहुँच आसान बनेगी और वित्त वर्ष 2027-28 तक कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 3.5 करोड़ टन सालाना तक पहुँचाने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।
लिमला सीमेंट प्लांट के शुरू होने से गुजरात में कंपनी की सीमेंट बिक्री को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही न्युवोको अब पश्चिमी महाराष्ट्र के आसपास के बाजारों तक भी आसानी से अपनी पहुँच बना सकेगी। वहीं, उत्तर भारत के प्लांट्स से अब सिर्फ उत्तर भारत के बाजारों की जरूरत पूरी करने में भी सुविधा होगी। इस प्लांट में ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट (ओपीसी), पोर्टलैंड स्लैग सीमेंट (पीएससी), पोर्टलैंड पोज़ोलाना सीमेंट (पीपीसी) और पोर्टलैंड कंपोजिट सीमेंट (पीसीसी) सहित कंपनी की पूरी सीमेंट रेंज का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा ग्राहकों को न्युवोको ड्यूरागार्ड की पूरी रेंज भी मिलेगी, जिसमें प्रीमियम प्रोडक्ट न्युवोको ड्यूरागार्ड माइक्रोफाइबर भी शामिल है। इस अधिग्रहण से राजस्थान के निम्बोल और चित्तौड़गढ़ में मौजूद न्युवोको के मौजूदा प्लांट्स के साथ भी बेहतर तालमेल बनेगा। इससे प्रोडक्ट्स की सप्लाई आसान होगी और प्रमुख बाजारों तक कंपनी की पहुँच और मजबूत होगी।

उन्होंने आगे कहा, “वदराज सीमेंट के अधिग्रहण के तहत हमने एक महत्वपूर्ण प्लांट को दोबारा तैयार कर रिकॉर्ड समय में शुरू किया है। यह हमारी टीम की बेहतर योजना और मिलकर किए गए काम का नतीजा है। इससे यह भी साबित हुआ है कि हम अधिग्रहित परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं, अपने वादे पूरे कर सकते हैं और अपने सभी हितधारकों का भरोसा लगातार मजबूत बना सकते हैं। यह उपलब्धि हमारी बेहतर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की क्षमता और लंबे समय तक स्थायी और लाभदायक विकास की दिशा में हमारे फोकस को भी उजागर करती है।”

