अहमदाबाद के कुश का अमेरिका में डंका: दुनिया की सबसे कठिन ‘फुल आयरनमैन ट्रायथलन’ पहले ही प्रयास में 14 घंटे 19 मिनट में की पूरी
खेल जगत में अहमदाबाद शहर का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन करते हुए, अहमदाबाद में पले-बढ़े और वर्तमान में शिकागो में कार्यरत क्लाउड इंजीनियर कुश ने 13 सितंबर 2026 को आयोजित 24वीं वार्षिक ‘आयरनमैन विस्कॉन्सिन’ प्रतियोगिता में इतिहास रच दिया है। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 226.3 किलोमीटर की अत्यंत कठिन रेस को 14 घंटे और 19 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। उत्तरी अमेरिका की नंबर-1 और दुनिया की शीर्ष 5 सबसे कठिन सिंगल-डे धीरज (एंड्यूरेंस) स्पर्धाओं में शामिल इस प्रतियोगिता में लगातार 3.8 किमी ओपन-वाटर स्विमिंग, 1702 मीटर चढ़ाई वाली 180.2 किमी साइकिलिंग और अंत में 42.2 किमी की पूरी मैराथन दौड़ शामिल थी। कुश ने विस्कॉन्सिन स्टेट कैपिटल में फिनिश लाइन पार की, जहाँ उन्हें विश्व प्रसिद्ध खिताब “यू आर एन आयरनमैन” (You are an Ironman) से नवाजा गया। कुश की यह ऐतिहासिक उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब गुजरात स्वयं वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की तैयारियों के तहत अहमदाबाद में अपनी पहली फुल-डिस्टेंस आयरनमैन ट्रायथलन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।
अहमदाबाद में पले-बढ़े कुश ने अपनी स्कूली शिक्षा जी.एल.एस. हाई स्कूल (GLS High School) से पूरी की और उसके बाद निरमा यूनिवर्सिटी (Nirma University) में अध्ययन किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए और शिकागो की डीपॉल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की। वर्तमान में शिकागो में 9-से-5 की क्लाउड इंजीनियर की फुल-टाइम नौकरी करने के साथ-साथ रियल एस्टेट का साइड बिजनेस संभालते हुए, कुश ने इस कठिन मुकाम को हासिल करने के लिए 4 साल की अनुशासित योजना बनाई। 2023 में मात्र 25 किमी की ‘स्प्रिंट ट्रायथलन’ से शुरुआत कर, 2024 में ओलंपिक ट्रायथलन और 2025 में हाफ आयरनमैन पूरा करते हुए उन्होंने हर साल अपनी दौड़ की दूरी दोगुनी की। इस सफलता के पीछे रोजाना सुबह 5:00 बजे उठना, सख्त न्यूट्रिशन, योग और मांसपेशियों की रिकवरी के लिए कोल्ड प्लंज व सॉना थेरेपी जैसी कड़ी दिनचर्या रही।

रेस के दौरान साइकिल की चेन उतरने जैसी तकनीकी समस्या और मैराथन के दौरान पैर के अंगूठे का नाखून निकल जाने के बावजूद कुश के हौसले नहीं डिगे। जब मैराथन के दौरान शारीरिक ऊर्जा खत्म होने लगी और असहनीय दर्द हुआ, तो उन्होंने मानसिक मलबल और आध्यात्मिक शक्ति बनाए रखने के लिए पूरी दौड़ के दौरान निरंतर ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ किया। शिकागो से विशेष रूप से मैडिसन पहुँचे उनके माता-पिता, परिवार और 28 से अधिक दोस्तों ने “Go Kush Go” की टी-शर्ट पहनकर पूरे रेस ट्रैक पर उनका उत्साहवर्धन किया। फिनिश लाइन पार करने के बाद कुश ने कहा कि जीवन में कितना भी बड़ा लक्ष्य क्यों न हो, उसे छोटे-छोटे चरणों (baby steps) में बाँटकर निरंतर प्रयास करने से हर असंभव मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

