“बलदेव का किरदार निभाने के बाद मैं खुद भी ऑनलाइन दुनिया में और ज्यादा सावधान हो गया हूं,” कहते हैं सुधांशु पांडे, कलर्स के शो ‘दो दुनिया एक दिल’ में।

“बलदेव का किरदार निभाने के बाद मैं खुद भी ऑनलाइन दुनिया में और ज्यादा सावधान हो गया हूं,” कहते हैं सुधांशु पांडे, कलर्स के शो ‘दो दुनिया एक दिल’ में।

कलर्स का शो ‘दो दुनिया एक दिल’ प्रीमियर से ही दर्शकों के दिलों में जगह बना चुका है। यह कहानी उस दुनिया की है जहां ऑफलाइन और ऑनलाइन ज़िंदगी सबसे अप्रत्याशित तरीके से टकराती है। इस कहानी के केंद्र में है शिवाय (विक्रम सिंह चौहान), जिसने अपनी ज़िंदगी का सपना इस विश्वास पर बनाया था कि टेक्नोलॉजी इंसानों की मदद कर सकती है। लेकिन एक खतरनाक डिजिटल स्कैम उसकी पूरी दुनिया उजाड़ देता है। वहीं है आध्या (राची शर्मा), एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, जिसकी पहचान ही ऑनलाइन दुनिया से बनी है। दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, फिर भी प्यार इन दोनों को जोड़ देता है। लेकिन असली ट्विस्ट तब आता है जब पता चलता है कि आध्या, बलदेव सिंह (सुधांशु पांडे) की बेटी है  वही शख्स जिसने शिवाय की ज़िंदगी तबाह कर दी। इस डिजिटल दौर में, जहां सच हर पल बदल सकता है और भरोसा एक क्लिक में टूट सकता है, बलदेव सबसे खतरनाक किरदार बन जाता है। सुधांशु पांडे बताते हैं कि डिजिटल युग के विलेन को निभाना उनके लिए क्या मायने रखता है।

  1. हमें शो के बारे में बताइए और इसमें बलदेव कहाँ फिट होता है। यह शो हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मौजूद ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दुनिया के टकराव को दिखाता है। कहानी का केंद्र है शिवाय, जिसने डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूरी बना ली है क्योंकि एक बड़े घोटाले ने उसका भरोसा उस दुनिया से तोड़ दिया। दूसरी तरफ़ है आध्या, जो एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है और उसी दुनिया में फल-फूल रही है जिसने शिवाय को बर्बाद किया। जब ये दोनों आमने-सामने आते हैं तो यह सिर्फ़ दो इंसानों की मुलाक़ात नहीं होती, बल्कि दो सोचों का टकराव होता है क्या असली है और क्या सिर्फ़ दिखता है।
  2. गृह मंत्रालय के साथ सहयोग शो के संदेश को कैसे मज़बूत बनाता है? कलर्स कई सालों से लोगों के घरों का हिस्सा रहा है, जहाँ परिवार एक साथ बैठकर कहानियाँ देखते हैं और वे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे चैनल से जुड़ा हूँ जो इस भरोसे की कद्र करता है और लगातार ऐसी कहानियाँ सुनाता है जिनमें मायने रखने वाले संदेश होते हैं। गृह मंत्रालय और इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के साथ यह सहयोग उसी सोच का बेहतरीन उदाहरण है।
  3. हमें आपके किरदार के बारे में बताइए। बलदेव सिंह चौहान ऐसा इंसान है जिसे अपनी आवाज़ ऊँची करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती, क्योंकि उसे बख़ूबी पता है कि सिस्टम कैसे चलता है और उससे भी ज़्यादा, वह जानता है कि डरे हुए लोगों के इस सिस्टम को अपने फ़ायदे के लिए कैसे इस्तेमाल करना है। हम कलियुग में जी रहे हैं, जहाँ हर इंसान के भीतर अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं।
  4. दो दुनिया एक दिलमें अपने किरदार की तैयारी आपने कैसे की? सच कहूँ तो बलदेव के लिए बहुत ज़्यादा पारंपरिक तैयारी की ज़रूरत नहीं थी। मुझे बस अवलोकन करना था। हम सबने कभी न कभी बलदेव जैसे किसी व्यक्ति से मुलाकात की है वह इंसान जो आकर्षक है, आत्मविश्वास से भरा है और हमेशा ऐसा खेल खेल रहा होता है जिसका किसी और को अंदाज़ा भी नहीं होता। ऐसे लोग अक्सर ज़िंदगी के सबसे रंगीन किरदार होते हैं।
  5. सोशल मीडिया अक्सर वास्तविकता का एक कृत्रिम रूप दिखाता है। क्या आपको लगता है कि यह लोगों के बीच विश्वास करने के तरीक़े को बदल रहा है? ईमानदारी से कहूँ तो, बलदेव का किरदार निभाने से मुझे इस बात का और ज़्यादा एहसास हुआ है कि ऑनलाइन किस पर भरोसा करना चाहिए और किस पर नहीं। सोशल मीडिया ने लोगों के भरोसे को देखने का तरीका बदल दिया है, लेकिन मैं इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं कहूँगा। करता है कि दर्शक उसे कैसे देखते और समझते हैं।
  1. कहानी आगरा में सेट की गई है, और आपने वहाँ काफ़ी समय शूटिंग में बिताया है। आपके लिए वह अनुभव कैसा रहा? आगरा वाकई शानदार है। इसके लिए कोई और शब्द नहीं है। यह शहर सदियों की इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है और साथ ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चहल-पहल भी यहाँ मौजूद है। गलियाँ ज़िंदा हैं, लोग बेहद अपनापन लिए हुए हैं, खाना लाजवाब है—और फिर अचानक किसी मोड़ पर आपको ऐसा अद्भुत स्मारक दिख जाता है जिसने कभी बादशाहों को भी विनम्र बना दिया। जहाँ शो की कहानी आधारित है, वहीं पर शूटिंग करना आपके अभिनय में एक अलग ही असर डालता है, जिसे कोई सेट कभी नहीं दे सकता।
  1. अपने प्रशंसकों के लिए कोई संदेश? सालों से मुझे प्यार और समर्थन देने वाले सभी दर्शकों को मैं दिल से धन्यवाद कहना चाहता हूँ। ‘दो दुनिया एक दिल’ के साथ आप एक ऐसी कहानी में कदम रखने जा रहे हैं जो हमारी आज की दुनिया से बेहद जुड़ी हुई है। यह उस ज़िंदगी के बारे में है जिसे हम असल में जीते हैं और उस ज़िंदगी के बारे में भी है जो हमारी स्क्रीन पर सामने आती है और जब ये दोनों दुनिया सबसे निजी तरीक़े से टकराती हैं तो क्या होता है। मेरे किरदार बलदेव सिंह इस टकराव में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

दो दुनिया एक दिलदेखना भूलें, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:00 बजे, केवल कलर्स और जियोहॉटस्टार पर।

MumbaiPatrika@1

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