‘बहेरूपियो’–लोककथा और सस्पेंस का अनोखा मेल
रेटिंग: 3/5 स्टार्स
गुजराती सिनेमा इन दिनों नए प्रयोगों की ओर बढ़ रहा है और इसी कड़ी में ‘बहेरूपियो’ (Behrupiyo) एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को डर और रहस्य की एक अलग दुनिया में ले जाने का प्रयास करती है। सावननाथ एंटरटेनमेंट और RSC फिल्म्स के बैनर तले बनी यह फिल्म ‘फोकलोर हॉरर’ (Folklore Horror) की शैली को छूती है।
कहानी और पटकथा
फिल्म की कहानी एक ऐसे गांव के इर्द-गिर्द घूमती है जो किसी प्राचीन श्राप या अनजानी शक्ति के साये में है। 21 युवतियों के गायब होने का रहस्य और विस्मृत हो चुकी लोककथाओं का ताना-बाना फिल्म को दिलचस्प बनाता है। लेखक कपिल सहेत्या और निर्देशक राजा संजय चोकसी ने “सत्य और भ्रम” के बीच की धुंधली रेखा को दिखाने की कोशिश की है, जो काफी हद तक प्रभावशाली है।
कलाकारों का प्रदर्शन
- किंजल राजप्रिया और जयेश मोरे: फिल्म की जान इसके कलाकार हैं। किंजल और जयेश ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। जयेश मोरे की परिपक्व अदाकारी रहस्य के माहौल को और गहरा बनाती है।
- मौलिक चौहान और डेनिशा घुमरा: इन दोनों कलाकारों ने भी कहानी के उतार-चढ़ाव को बखूबी निभाया है। फिल्म की स्टारकास्ट ने अपने अभिनय से स्क्रिप्ट की कमियों को ढकने की पूरी कोशिश की है।
तकनीकी पक्ष और संगीत
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका बैकग्राउंड स्कोर (BGM) है। रुशिन दलाल और कैज़ाद घेरडा का संगीत डर पैदा करने में सफल रहा है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी गांव के डरावने और रहस्यमयी माहौल को अच्छी तरह से स्क्रीन पर उतारती है। संवाद (Dialogues) कुछ जगहों पर काफी गहरे और प्रभावशाली हैं।
निष्कर्ष
‘बहेरूपियो’ एक ईमानदार कोशिश है, हालांकि सेकंड हाफ में फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है और कुछ दृश्यों में सस्पेंस को और अधिक सटीक बनाया जा सकता था। फिर भी, अगर आप पारंपरिक हॉरर से हटकर कुछ अलग और लोककथाओं पर आधारित थ्रिलर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
गुजराती सिनेमा में इस तरह के साहसी विषयों का आना फिल्म इंडस्ट्री के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

