इस शो के ज़रिए मैं चाहता हूँ कि लोग मुश्किलों से ऊपर उठकर अपनी ज़िंदगी को फिर से संवारने की प्रेरणा लें,” कहते हैं विक्रम सिंह चौहान कलर्स के ‘दो दुनिया एक दिल’ पर।
कलर्स का ‘दो दुनिया एक दिल’ प्रीमियर से ही दर्शकों के दिलों में जगह बना चुका है, जहाँ ऑफलाइन और ऑनलाइन दुनिया सबसे अप्रत्याशित तरीक़े से टकराती है। इस कहानी के केंद्र में है शिवाय (विक्रम सिंह चौहान), एक ऐसा इंसान जिसने अपने सपनों को इस विश्वास पर बनाया कि तकनीक लोगों के लिए अच्छा कर सकती है। लेकिन एक खतरनाक डिजिटल स्कैम उसकी हर चीज़ छीन लेता है और उसे पूरी तरह तोड़ देता है। वहीं है आध्या (राची शर्मा), एक युवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जिसने अपनी पूरी पहचान ऑनलाइन दुनिया में बनाई है। दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, फिर भी प्यार अपनी राह बना लेता है। कहानी का सबसे बड़ा मोड़ यह है कि आध्या, बलदेव सिंह (सुधांशु पांडे) की बेटी है, वही शख्स जिसने शिवाय की ज़िंदगी तबाह की। शिवाय का किरदार निभा रहे विक्रम सिंह चौहान बताते हैं कि कैसे उन्होंने एक ऐसे इंसान को पर्दे पर उतारा जिसकी डिजिटल दुनिया पर भरोसा टूट जाती है, लेकिन उसी दुनिया से उसे प्यार मिलता है।
- ‘दो दुनिया एक दिल’ के बारे में बताइए। इस शो के लिए हाँ क्यों कहा?
- जब मैंने कहानी सुनी तो सबसे पहले इसकी प्रासंगिकता ने मुझे प्रभावित किया। यह एक प्रेमकथा है जो हमारी रोज़मर्रा की दो अलग-अलग हकीकतों के बीच सेट है। शिवाय वह इंसान है जो मानता था कि तकनीक लोगों को सशक्त बना सकती है, लेकिन जब एक स्कैम उसकी बनाई हर चीज़ छीन लेता है, तो उसका भरोसा डिजिटल दुनिया से पूरी तरह टूट जाता है। वह असली बातचीत और सच्चे रिश्तों पर ध्यान देने लगता है। दूसरी तरफ आध्या है, जो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है और पूरी तरह ऑनलाइन दुनिया में जीती है। जब ये दोनों प्यार में पड़ते हैं तो उनका रिश्ता लगातार इस सवाल से जूझता है कि असली क्या है और ऑनलाइन क्या है। कहानी में यह भी खुलासा होता है कि आध्या के पिता ही शिवाय की तबाही के ज़िम्मेदार हैं। यह संघर्ष मुझे बेहद वास्तविक लगा क्योंकि आज हमारी ज़िंदगी लगातार दो जगहों पर चलती है—वास्तविक दुनिया और ऑनलाइन दुनिया। आज मान्यता भी ऑनलाइन मिलती है—एक लाइक, एक कमेंट या एक वायरल पल लोगों की आत्म-धारणा तय करने लगता है। शिवाय ने सोचा था कि वह उस दुनिया से बाहर निकल चुका है, लेकिन प्यार ने उसे फिर से उसमें खींच लिया। यही भावनात्मक विरोधाभास मुझे इस शो का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर गया। यह जेन -Z स्टोरीटेलिंग है जिसमें मिलेनियल वाइब है और जो बूमर्स को भी मुस्कुराने पर मजबूर करेगी।
- अपने किरदार शिवाय के बारे में बताइए।
- शिवाय डिजिटल युग का ‘एंग्री यंग मैन’ है। उसका गुस्सा धोखे और नुकसान से आता है। उसने तकनीक और प्रगति पर भरोसा किया था, लेकिन जब एक साइबर स्कैम उसकी बनाई हर चीज़ छीन लेता है, तो उसका विश्वास रातों-रात टूट जाता है। वह गहरे ज़ख्मों से गुज़रता है और सतर्क हो जाता है। लेकिन इसी अनुभव से वह यह सवाल करने लगता है कि असल मायने क्या रखते हैं। उसके गुस्से के पीछे एक ऐसा इंसान है जो असली भावनाओं और सच्चे रिश्तों को महत्व देता है। वह आध्या से प्यार करता है और अपने जज़्बात को बेहद शायराना अंदाज़ में व्यक्त करता है। सब कुछ खोने के बावजूद वह नए सिरे से शुरुआत करने का संकल्प लेता है। शिवाय वह इंसान है जो डिजिटल दुनिया को अपनी ज़िंदगी और प्यार तय करने नहीं देता, और यही विरोधाभास उसकी यात्रा का दिल बन जाता है।
- इस किरदार के लिए आपने कैसे तैयारी की?
- मैंने स्कैम को सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं माना। आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि लोग एक डिजिटल फ्रॉड की वजह से अपनी बचत या कारोबार खो देते हैं। हम इंटरनेट पर भरोसा करते हैं, लेकिन एक गलत क्लिक सब कुछ तबाह कर सकता है। तैयारी के दौरान मैंने कुछ असली साइबर फ्रॉड केस पढ़े और उन लोगों के अनुभवों को समझा। सबसे ज़्यादा असर इस बात ने किया कि यह उनकी भरोसे की भावना को कितना तोड़ देता है। पैसा एक हिस्सा है, लेकिन असली नुकसान भावनात्मक होता है। लोग ज़्यादा सतर्क और सावधान हो जाते हैं।
- यह शो ऑनलाइन और ऑफलाइन दुनिया के बीच के कॉन्ट्रास्ट को एक्सप्लोर करता है। आप उस फर्क को कैसे देखते हैं, खासकर जब बात रिश्तों और इमोशन्स की आती है?
- डिजिटल दुनिया ने कलाकारों के लिए दर्शकों से जुड़ना आसान बना दिया है। पहले यह जुड़ाव टीवी या इंटरव्यूज़ के ज़रिए होता था, लेकिन आज सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रिया मिलती है। कभी-कभी मैं एपिसोड के बाद कमेंट्स पढ़ता हूँ और यह देखना दिलचस्प होता है कि लोग कितनी गहराई से प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन रिश्ते ऑनलाइन और ऑफलाइन बहुत अलग तरह से चलते हैं। ऑनलाइन सब कुछ तेज़ी से होता है और लोग जल्दी राय बना लेते हैं। असली रिश्ते और भावनाएँ समय और ईमानदार बातचीत से बनते हैं। आप किसी की पोस्ट देखकर सोच सकते हैं कि आप उसे जानते हैं, लेकिन असली समझ सिर्फ असली बातचीत से आती है।
- वही कॉन्ट्रास्ट शो शिवाय और आध्या के ज़रिए एक्सप्लोर करता है दो ऐसे लोग जिनका डिजिटल वर्ल्ड से रिश्ता बिल्कुल अलग है, लेकिन धीरे-धीरे वे एक-दूसरे को समझना सीखते हैं। कई मायनों में हमारी जनरेशन ऑनलाइन सब कुछ शेयर करती है, लेकिन ऑफलाइन सच में खुलकर सामने आना अब भी मुश्किल लगता है।
- यह शो गृह मंत्रालय के साथ मिलकर साइबरक्राइम को लेकर जागरूकता फैलाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा भी है। आपको क्या लगता है, यह पहल कितनी अहम है?
- गृह मंत्रालय और इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के साथ सहयोग शो को एक अहम आयाम देता है क्योंकि साइबर फ्रॉड आजकल लोगों के बीच बड़ा मुद्दा बन रहा है। हम रोज़मर्रा के कामों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं पेमेंट्स, शॉपिंग, जानकारी साझा करना और छोटे संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इस पहल के ज़रिए शो दर्शकों को याद दिलाता है कि अगर कभी साइबर फ्रॉड का सामना हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर जाएँ। मुझे लगता है यह पहल बेहद मायने रखती है क्योंकि मनोरंजन लाखों लोगों तक पहुँचता है। इस शो के ज़रिए मैं चाहता हूँ कि लोग मुश्किलों से ऊपर उठकर अपनी ज़िंदगी को फिर से संवारने की प्रेरणा लें।
- कहानी आगरा में सेट की गई है और आपने वहाँ शूटिंग में समय बिताया। वह अनुभव कैसा रहा?
- चूँकि कहानी आगरा की है, वहाँ समय बिताना मुझे शिवाय की दुनिया में ढलने में मददगार रहा। शहर की रफ़्तार बड़े शहरों की डिजिटल संस्कृति से अलग है। वहाँ एक ज़मीनीपन है, लोग अपनी बातचीत में ज़्यादा मौजूद रहते हैं और ज़िंदगी थोड़ी कम भागदौड़ वाली लगती है। मैंने ब्रेक्स के दौरान बाज़ारों में घूमना और लोगों को देखना शुरू किया। ये छोटे-छोटे अनुभव आपको उस माहौल को आत्मसात करने में मदद करते हैं जिसमें आपका किरदार रहता है। शिवाय जैसे किरदार के लिए, जो सादगी और असली रिश्तों को महत्व देता है, ऐसे शहर में रहना उसके सोच को स्वाभाविक रूप से अपनाने में मददगार रहा।
- राची शर्मा और सुधांशु पांडे के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
- दोनों के साथ काम करना बेहद सुखद रहा क्योंकि वे शो में अलग-अलग ऊर्जा लेकर आते हैं। राची में एक नैचुरल स्पॉन्टेनिटी है जो आध्या के किरदार को पूरी तरह सूट करती है। वह उस दुनिया को बहुत सहजता से समझती है जहाँ दिखना और अभिव्यक्ति अहम है, और यही शिवाय के साथ उसका कॉन्ट्रास्ट दिलचस्प बनाता है। सुधांशु सर के साथ एक शांत अधिकार है जो बलदेव के किरदार को तुरंत भावनात्मक गहराई देता है। वह इतने अनुभवी हैं कि ऑफ-कैमरा भी आप उनसे बहुत कुछ सीखते हैं। जब कलाकार अपने किरदारों को पूरी तरह समझते हैं और सीन में मौजूद रहते हैं, तो इंटरैक्शन बहुत ऑर्गेनिक हो जाता है। मेरे लिए सबसे अच्छा हिस्सा यही रहा कि किरदारों के बीच कुछ भी बनावटी नहीं लगा, रिश्ते कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से विकसित होते गए।
- दर्शक आगे क्या देख सकते हैं जैसे–जैसे कहानी आगे बढ़ेगी?
- जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शक देखेंगे कि शिवाय और आध्या का रिश्ता बिल्कुल भी आसान नहीं है। इसमें एक लव स्टोरी है, ऑफलाइन और ऑनलाइन दुनिया के बीच खींचतान है, कॉम्प्लिकेटेड फैमिली डायनैमिक्स हैं और स्कैम्स के इर्द-गिर्द सस्पेंस भी है। मैं बहुत एक्साइटेड हूँ कि ऑडियंस इस रोलरकोस्टर राइड को एक्सपीरियंस करे, जिसमें हर किसी के लिए कुछ न कुछ है।
देखिए ‘दो दुनिया एक दिल’ हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:00 बजे सिर्फ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर।

