कलाकार राजेंद्र कडिया का सोलो एक्ज़ीबिशन “फेससरफेस : पेंटिंग एज़ प्रोसेस’ का अहमदाबाद में भव्य आयोजन
अहमदाबाद: शहर के प्रतिष्ठित एल एंड पी हुथीसिंग विजुअल आर्ट सेंटर में प्रसिद्ध कलाकार राजेंद्र काया का नवीनतम फेससरफेस : पेंटिंग एज़ प्रोसेस’ का शुभारंभ होने जा रहा है। यह एक्ज़ीबिशन मंगलवार, 17 मार्च 2026 से शुरू हुआ और रविवार, 22 मार्च 2026 तक जारी रहेगी। इस एक्ज़ीबिशन में राजेंद्र कडिया के हालिया कला कार्यों का एक प्रभावशाली संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मिक्स्ड मीडिया, कागज पर एक्रिलिक और टेराकोटा सोरा जैसे माध्यमों का कुशलता से प्रयोग किया गया है। कलाकार ने इस श्रृंखला में मानव चेहरे को एक गतिशील दृश्य क्षेत्र के रूप में देखते हुए उसे अपनी कलात्मक खोज का केंद्र बनाया है।
राजेंद्र कडिया की कलाकृतियाँ चेहरे को केवल एक पारंपरिक चित्र या समानता के रूप में प्रस्तुत नहीं करतीं, बल्कि इसे एक ऐसी सतह के रूप में देखती हैं जहाँ हाव-भाव, बनावट, स्मृति और सामग्री का अद्भुत मिलन होता है। उनकी पेंटिंग्स में आकृतियाँ और रेखाएँ सहज रूप से उभरती, एक-दूसरे पर परतें बनाती और फिर विलीन हो जाती हैं, जिससे पूरी रचना एक जैविक प्रवाह में विकसित होती है। उनके काम में रंगों के गहरे प्रयोग और सूक्ष्म संयम के बीच एक अनूठा संतुलन दिखाई देता है, जहाँ छवियाँ आकृति और अमूर्तता के बीच झूलती नजर आती हैं। इन कलाकृतियों में चेहरा किसी व्यक्तिगत पहचान के बजाय उपस्थिति और पेंटिंग की विकसित होती भाषा का अनुभव कराता है।
इस एक्ज़ीबिशन का एक विशिष्ट आकर्षण टेराकोटा ‘सोरा’ पर किए गए कार्य हैं। मिट्टी की इन वृत्ताकार तश्तरियों का उपयोग एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक आयाम जोड़ता है, जहाँ मिट्टी की सोंधी बनावट और सांस्कृतिक गहराई कला को एक नया स्पर्श देती है। कलाकार ने इन पारंपरिक सतहों को अपने आधुनिक नजरिए से समकालीन दृश्य अभिव्यक्तियों में बदल दिया है। यह वृत्ताकार धरातल स्मृतियों, निरंतरता और प्रतिबिंब के चक्रों को दर्शाते हुए एक सीमित लेकिन गतिशील स्थान में छवियों को जीवंत करता है।

‘फेससरफेस : पेंटिंग एज़ प्रोसेस’ राजेंद्र काडिया के कलात्मक अभ्यास के एक परिपक्व और आत्मविश्वासी चरण को प्रदर्शित करता है। उनके कार्यों में दृष्टि की स्पष्टता और पेंटिंग की प्रक्रिया के प्रति गहरा समर्पण झलकता है। कलाकार ने अपनी कला के निशानों और परतों को दृश्यमान रखकर दर्शकों को हाथ, सामग्री और कल्पना के बीच होने वाले निरंतर संवाद का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किया है। यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों को पेंटिंग को केवल एक अंतिम छवि के रूप में नहीं, बल्कि विचार, संकेत और परिवर्तन की एक सतत यात्रा के रूप में देखने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी 22 मार्च तक प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

