मातृभाषा दिवस पर ‘मन नी मोजनीशी’ का एक वर्ष पूर्ण: 21 फरवरी को विशेष संगीत और साहित्यिक कार्यक्रम
अहमदाबाद: गुजराती भाषा, साहित्य और संस्कृति के जतन के लिए कार्यरत ‘प्रदान चैरिटेबल ट्रस्ट – कलाधाम’ तथा प्रख्यात कलाकार जोड़ी श्यामल और सौमिल मुंशी द्वारा आगामी 21 फरवरी, 2026 को एक विशेष संगीत और साहित्यिक कार्यक्रम ‘मन नी मोजनीशी’ का आयोजन किया गया है। इस दिन के चयन का विशेष कारण यह है कि उस दिन ‘विश्व मातृभाषा दिवस’ है, जो इस आयोजन को और अधिक गौरवपूर्ण बनाता है। मार्च 2025 में शुरू हुई ‘मन नी मोजनीशी’ श्रृंखला हर महीने निरंतर आयोजित होती रही है और फरवरी में होने वाला यह कार्यक्रम इस श्रृंखला का 12वां मणका (कड़ी) है, जिसके साथ यह उपक्रम सफलतापूर्वक अपना एक वर्ष पूर्ण करेगा। यह कार्यक्रम गुजराती साहित्य परिषद के हॉल में आयोजित होगा, जिसे संस्था द्वारा इस नेक उद्देश्य के लिए निःशुल्क आवंटित किया गया है।
इस संबंध में कलात्मक और संगीत संबंधी पक्षों की चर्चा करते हुए प्रसिद्ध कलाकार आरती मुंशी तथा श्यामल और सौमिल मुंशी ने विस्तृत जानकारी साझा की। उनके साथ प्रदान चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी मालवभाई ने तकनीकी और CSR फंडिंग के बारे में विवरण दिया। उल्लेखनीय है कि गुजराती साहित्य परिषद द्वारा भी इस उत्तम कार्य के लिए हॉल निःशुल्क प्रदान कर अपना विशेष सहयोग दिया जाता है। इस अनूठी श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी में गुजराती भाषा के प्रति गर्व की भावना जगाना और विस्मृत होते जा रहे साहित्य को पुनर्जीवित करना है। इस उपक्रम के अंतर्गत हर महीने जिन साहित्यकारों या कवियों का जन्म अथवा निधन हुआ हो, उनकी कृतियों के गायन और पठन के माध्यम से उन्हें एक अनूठी स्मरण वंदना अर्पित की जाती है।
आगामी 21 फरवरी का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन ‘विश्व मातृभाषा दिवस’ होने के कारण इस साहित्यिक श्रृंखला की 12वीं कड़ी प्रस्तुत होगी, जिससे इस प्रोजेक्ट का एक वर्ष भी पूर्ण होगा। यह भव्य उत्सव गुजराती साहित्य परिषद के हॉल में आयोजित होगा, जहाँ आम जनता के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा गया है ताकि कवि, कलाकार और सामान्य जन इस साहित्यिक विरासत का लाभ उठा सकें। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रतिष्ठित कलाकार बिना किसी व्यावसायिक शुल्क के अपना कलात्मक योगदान देते हैं। आगामी वर्ष की कड़ियों के आयोजन के लिए प्रूडेंट फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा उनके CSR फंड के तहत उदारतापूर्वक सहयोग दिया गया है, जो इस साहित्यिक अभियान को निरंतर गतिमान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसी भी संस्कृति की नींव उसकी भाषा में निहित होती है और गुजराती भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि हमारी भव्य विरासत, संस्कारों और अस्मिता का प्रतिबिंब है। वर्तमान समय में जब नई पीढ़ी वैश्वीकरण के प्रवाह में अपनी मूल भाषा से दूर हो रही है, तब ‘मन नी मोजनीशी’ जैसे कार्यक्रम समाज में एक नई चेतना जगाने का कार्य करते हैं। साहित्यिक कृतियों के गायन और पठन द्वारा युवा पीढ़ी को मातृभाषा के माधुर्य और शब्दों की शक्ति से परिचित कराना समय की मांग है। इस प्रकार के आयोजन समाज में यह संदेश फैलाते हैं कि यदि हम अपनी भाषा को सहेजेंगे, तभी हमारी संस्कृति और संस्कार जीवित रहेंगे। साहित्य की इस समृद्ध विरासत को जन-जन तक पहुँचाकर गुजराती भाषा के प्रति सम्मान और गौरव की भावना पैदा करना ही इस संपूर्ण अभियान का मूल मंत्र है।

